Dr. Syama Prasad Mookerjee Research Foundation

Salient points of PM’s Statement in Lok Sabha

Salient points of PM’s Statement in Lok Sabha on conclusion of debate on commitment to the constitution as a part of 125th birth anniversary celebration of Dr. B.R. Ambedkar  बायत विविधताओं से बया हुआ देश है। हभ सफको फांधने की ताकत संविधान भें है। हभ सफको फढाने की ताकत संविधान भें है औय इसलरए सभम की भांग है कक हभ संविधान की sanctity, संविधान की शक्तत औय संविधान भें ननहहत फातों से जन-जन को ऩरयचित कयाने का एक ननयंतय प्रमास कयें। औय इसको हभें एक ऩूये Religious बाि से, एक सभवऩित बाि से इस प्रकिमा को कयना िाहहए। 26 निंफय संविधान हदिस के भाध्मभ से सयकाय की सोि है औय इसभें धीये-धीये सुधाय बी होगा। मह evolve बी होगा तमोंकक मे तो प्रायंलबक विषम है। कोई िीज अल्टीभेट नहीं होती है। उसभें ननयंतय विकास होता यहता है।  इतना उत्तभ संविधान जो हभें लभरा है, इसकी हभ क्जतनी सयाहना कयें उतनी कभ है। हभ क्जतना गौयि कयें उतना कभ है। औय अगय संविधान को सयर बाषा भें भुझे कहना है तो हभाया संविधान Dignity for Indian and unity for India इस दोनों भूर भंत्रों को साकाय कयता है। जनसाभान्म की Dignity औय देश की एकता औय अखंडता। फाफा साहफ अम्फेडकय की बूलभका को हभ कबी बी नकाय नहीं सकते। इसका भतरफ मे नहीं कक फाफा साहफ अम्फेडकय की फात कयते हैं तो औयों का कोई काभ नहीं होता।  अगय संविधान फनाने भें फाफा साहफ अम्फेडकय न होते, भुझे ऺभा कयें भैं ककसी की आरोिना नहीं कय यहा, तो शामद, हभाया संविधान देश िराने के लरए, शासन िराने के लरए उत्तभ हो सकता था। रेककन िो संविधान साभाक्जक दस्तािेज फनने से िूक जाता। मह साभाक्जक दस्तािेज क्जसने फनामा है, उन फाफा साहफ अम्फेडकय का ददि, उनकी ऩीडा, उन्होंने जो झेरा था, उन मातनाओं का अकि उसभें शब्द फनकय ज़हय ननकर यहा होता औय तफ उस सभम जा कयके संविधान का ननभािण हुआ था। औय तफ जा कयके विदेशी व्मक्तत
ने कहा था कक मह एक साभाक्जक दस्तािेज है। औय इसलरए इसे िैधाननक दस्तािेज न भानते हुए, साभाक्जक दस्तािेज कहना कबी-कबी भुझे रगता है हभ बी जानते होंगे।  हभ सफ भनुष्म हैं, कलभमां हभ सफ भें हैं औय एकाध गरत िीज हो जाए तो रंफे अयसे तक हदभाग से जाती नहीं हैं। ककसी ने कुछ शब्द फोर हदमा हो तो िुबता यहता है, साभने लभरता है तो िो नहीं हदखता है, शब्द माद आता है। मह हभरोगों का स्िबाि है। आऩ कल्ऩना कय सकते हैं कक एक दलरत भां का फेटा क्जसने जन्भ से जीिन तक लसपि मातनाएं झेरीं, अऩभाननत होता यहा, उऩेक्षऺत होता यहा, डगय-डगय उनको सहना ऩडा। उसी व्मक्तत के हाथ भें जफ देश के बविष्म का दस्तािेज फनाने का अिसय आमा, तो इस फात की ऩूयी संबािना होती कक महद िह हभ जैसा भनुष्मक होता तो िो कटुता, िो जहय, कहीं न कहीं प्रकट होता। फदरे की कहीं आग ननकर आती, कहीं बाि ननकर आता। रेककन मह फाफा साहफ अम्फेडकय की ऊंिाई थी कक जीिन बय उन्होंनने झेरा रेककन संविधान भें कहीं ऩय िो फदरे का बाि नहीं है। मह उस भहानता, उस व्मक्ततत्ि की ऊंिाई है, क्जसके कायण ऐसा संबि होता है। ियना हभ सफ जानते हैं हभ भनुष्म हैं, हभको भारूभ है, एक शब्द बी ऐसा िूक जाता है ननकरता नहीं है। जीिन भें ककतनी ऊंिाई होगी, बीतय की सोि ककतनी भजफूत होगी। उस भहाऩुरूष ने उन साये जहय को ऩी लरमा औय हभाये लरए अभृत छोड कयके गमे औय इसलरए उस भहाऩुरूष के लरए भुझे संस्कृत का एक शब्द माद आता है। स्िबािभ न जहा त्मेि साधुया आऩद् गतोऽवऩ सन् । कऩूिय् ऩािक स्ऩशि: सौयबं रबते तयाभ् ॥  महद हभ रोकतंत्र को रूऩ भें ही नहीं फक्ल्क सि भें फनामे यखना िाहते हैं, तो हभें तमा कयना िाहहए। भेये वििाय भें ऩहरी िीज जो हभें कयनी िाहहए िह है कक अऩने साभाक्जक औय आचथिक रक्ष्मों को प्राप्त कयने के लरए संिैधाननक तयीकों का दृढता से ऩारन कयना िाहहए। जहां संिैधाननक तयीके खुरे हैं िहां इन असंिैधाननक तयीकों का औचित्म नहीं हो सकता। मह तयीके औय कुछ नहीं फक्ल्क अयाजकता हैं, औय उन्हें शीघ्र ही छोडना हभाये लरए फेहतय होगा।  संविधान आधायबूत दस्तािेज है। मह िह दस्तािेज है जो याज्मों के तीनों अंगों कामि ऩालरका, न्माम ऩालरका औय विधानमका की क्स्थनत औय शक्ततमों को ऩरयबावषत कयता है। मह कामि ऩालरका की शक्ततमों औय विधानमकाओं को नागरयकों के प्रनत बी ऩरयबावषत कयता है। जैसा कक हभने भौलरक अचधकायों के अध्मानम भें ककमा है। िस्तुत: संविधान का उद्देश्म याज्मों के अंगों का भात्र सृजन कयना नहीं है। फक्ल्क उसके प्राचधकाय को सीलभत कयना है। तमोंकक महद अंग के प्राचधकाय ऩय सीभा नहीं रगाई जाती तो िह ऩुन: ननयंकुश
होगा। विधानमका ककसी बी कानून को फनाने के लरए स्ितंत्र हो, कामि ऩालरका कोई बी ननणिम रेने के लरए स्ितंत्र हो तथा सिोच्म न्मामारम कानून की कोई बी व्माख्मा कयने के लरए स्ितंत्र हो, तो इसकी ऩरयणनत अयाजकता भें होगी। मह फात फाफा साहफ अम्फेडकय ने फहुत ही ऩूयी ताकत के साथ कही थी।  फाफा साहफ अम्फेडकय ने आयऺण की व्मिस्था को फर न हदमा होता तो कोई भुझे फताएं कक भेये दलरत, ऩीडडत, शोवषत सभाज की हारत तमा होती। ऩयभात्भा ने उसको सफ हदमा है जो भुझे आऩको हदमा है, रेककन उसे अिसय नहीं लभरा औय उसके लरए उसकी दुदिशा है। अिसय देना हभाया दानमत्ि फनता है। अिसय देना हभ सफका दानमत्ि फनता है औय सभाज का इतना फडा तफका जफ विकास की मात्रा ऩय हभाये साथ कंधे से कंधा लभराकय िरने िारा साथ खडा हो जाए तो देश कहां से कहां ऩहुंि जाएगा।  कोई बूबाग ऩीछे नहीं यहना िाहहए। कोई सभाज ऩीछे नहीं यहना िाहहए। अगय शयीय का एक अंग रकिा भाय गमा हो, तो शयीय को स्िस्थ नहीं भाना जाता है। अगय शयीय का एक अंग बी Weak है तो मे शयीय कबी स्िस्थ नहीं भाना जाता। इस सभाज भें ऩुरुष का कोई एक अंग ननफिर है तो कपय मे सभाज सशतत नहीं भाना जा सकता। मह याष्र सशतत नहीं भाना जा सकता। औय इसलरए याष्र का सशक्ततकयण उसभें है कक सभाज के सबी अंग, सबी अंग सशतत हों। ऩुरुष हों, स्त्री हों इस जानत के, उस जानत के, इस ऩंथ के, उस ऩंथ के हों। मे बाषा िारे, उस बाषा िारे हों इस बू बाग यहते हों, उस बू बाग यहते हों। हभाये लरए आिश्मक होता है कक सफके सशक्ततकयण के लरए हभ तमा काभ कयें औय उस काभ को हभको ऩूया कयना होगा। हभाये साभने फहुत फहढमा अिसय बी है, िुनौती बी है। बायत, भूरत् क्जन आदशों वििायों से ऩरा-फढा है िो हभायी एक ताकत है। िो हभायी एक आक्त्भक शक्तत है औय इसलरए हभें कबी हभाये देश की जो अंतय ऊजाि है उसको कभ आंकने की जरूयत नहीं है। हजायों सार की तऩस्मा से अंतय ऊजाि तैमाय हुई है। औय िही देश को बी गनत देती है, सभाज को बी गनत देती है औय संकटों से उफयने की ताकत बी देती है। औय तफ भैं जफ उसकी फात कयता हूं तो भैं कहना िाहूंगा Idea of India. My Idea of India – सत्मभेि जमते My Idea of India – अहहंसा ऩयभो धभि् My Idea of India – एकभ सद विप्रा् फहुधा् िदक्न्त सत्म My Idea of India – ऩौधों भें ऩयभात्भा हदखना
My Idea of India – िसुधैि कुटुम्फकभ् My Idea of India – सिि ऩंथ सभबाि My Idea of India – अप्ऩ दीऩो बि् My Idea of India – तेन त्मततेन बुक्न्जथा My Idea of India – सिे बिन्तु सुखखन् सिे सन्तु ननयाभमा् My Idea of India – न त्िहं काभमे याज्मं न स्िगं न ऩुनबििभ् काभमे दु्खतप्तानां प्राखणनाभानतिनाशनभ् My Idea of India – िैष्णि जन तो तेने कहहमे जे ऩीड ऩयामी जाणे ये My Idea of India – जन सेिा ही प्रबु सेिा My Idea of India – सह नािितु सह नौ बुनततु सह िीमं कयिािहै तेजस्िी नािधीतभस्तु भा विविषािहै My Idea of India – नय कयनी कये तो नायामण हो जाए My Idea of India – नायी तू नायामणी My Idea of India – मत्र नामिस्तु ऩूज्मन्ते यभन्ते तत्र देिता् My Idea of India – आ नो बद्ा् ितिो मन्तु विश्ित् My Idea of India – जननी जन्भबूलभश्ि स्िगािदवऩ गयीमसी

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