पिछले 150-200 वर्षों में मानव जाति अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए धरती के नीचे दबे संसाधनों पर ही ज्यादा निर्भर रही है।
हमारी प्रकृति ने कैसे इसका विरोध किया है, और आज भी कर रही है, ये हम सभी देख रहे हैं
प्रकृति हमें लगातार संदेश दे रही है कि जमीन के ऊपर मौजूद ऊर्जा, चाहे वो सूर्य में हो, वायु में हो या पानी में, यही बेहतर और सुरक्षित भविष्य का समाधान है।
मुझे खुशी है कि आज हम सभी, प्रकृति से मिल रहे इस संदेश पर मंथन के लिए एकजुट हुए हैं
मुझे लगता है जब भी भविष्य में 21वीं सदी में स्थापित मानव कल्याण के बड़े संगठनों की चर्चा होगी, तो International Solar Alliance (ISA) का नाम उसमें सबसे ऊपर होगा।
ISA के तौर पर हम सभी ने Climate Justice को सुनिश्चित करने की दिशा में, एक बहुत बड़ा मंच तैयार किया है
मेरा ये मानना रहा है कि दुनिया की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए जो भूमिका आज OPEC निभार रहा है, वही भूमिका आने वाले समय में International Solar Alliance की होने वाली है।
जो रोल आज तेल के कुओं का है, वही रोल भविष्य में सूर्य की किरणों का होने वाला है
Renewable Energy के बढ़ते उपयोग का भारत में असर दिखने लगा है
पैरिस समझौते के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए Renewable Energy की deployment के एक्शन प्लान पर काम हम शुरु कर चुके हैं
हमने तय किया है कि 2030 तक हमारी 40% बिजली की क्षमता Non Fossil Fuel Based संसाधनों से पैदा हो
आज भारत Poverty to Power के नए आत्मविश्वास के साथ विकास कर रहा है।
इस नए आत्मविश्वास को शक्ति देने के लिए भी हमने उसको चुना है, जो हज़ारों वर्षों से हमारी शक्ति का स्रोत रहा है, ऊर्जा का भंडार रहा है।
ये भंडार है सूर्य का जिसको हम भारतीय सूर्यदेव भी कहते हैं
Power Generation के साथ-साथ Power Storage भी अहम है। National Energy Storage Mission पर काम किया जा रहा है।
इस मिशन के तहत सरकार Demand Creation, Indigenous Manufacturing, Innovation और Energy Storage की क्षमता बढ़ाने के लिए Policy Support पर बल दे रही है
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