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G-20 में ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के मंत्र से विश्व को समाधान देगा भारत

हमारे भारत ने ‘1 दिसंबर’ 2022 से शक्तिशाली समूह G-20 की अध्यक्षता संभाली है। निश्चित रूप से यह प्रत्येक भारतवासी के लिए बहुत बड़ा अवसर है । यह वैश्विक मंच भारत के बढ़ते महत्व को दर्शाने की बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। दरअसल  बीते कुछ वर्षों में ही ऐसे कई मौके आए हैं जब भारत की स्थिति वैश्विक मंचों पर लगातार बढ़ रही है। यह आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के प्रयासों का ही परिणाम है कि ‘न्यू इंडिया’ अब तेजी से आकार ले रहा है।

गौरतलब है कि G-20 ग्रुप का गठन वर्ष 1999 के दशक के अंत में वित्तीय संकट की पृष्ठभूमि में किया गया था, जिसने विशेष रूप से पूर्वी एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया को प्रभावित किया था। इसका उद्देश्य मध्यम आय वाले देशों को शामिल कर वैश्विक स्थिरता को सुरक्षित करना है। G-20  देशों में विश्व की 60% आबादी, वैश्विक GDP का 85% और वैश्विक व्यापार का 75% योगदान होता  है। G-20 ग्रुप में अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, यूरोपियन यूनियन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, कोरिया गणराज्य, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका सहभागी हैं। G-20 सम्मेलन में स्पेन को स्थायी अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाता है।

भारत को G-20 की अध्यक्षता मिलना एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। भारत को यह दायित्व पहली बार मिला है। इससे न केवल यह सिद्ध होता है कि विश्व मंच पर भारत का कद बढ़ रहा है, बल्कि यह भी कि अंतरराष्ट्रीय समस्याओं को सुलझाने में उसकी क्षमता भी बढ़ रही है। निःसंदेह इसकी एक व्याख्या इस रूप में भी हो सकती है कि विश्व समुदाय का भारत पर भरोसा बढ़ रहा है।

इस भरोसे के बढ़ने का एक बड़ा कारण भारत की आर्थिक सामर्थ्य में वृद्धि के साथ अंतरराष्ट्रीय विषयो में विश्व को प्रभावित करने वाली नीतियां हैं। जिसमे हमारी रूस यूक्रेन युध्य के समय की तटस्थता हो या फिर चीन के साथ टकराव में भारत की कूटनीति हो, हम हमेशा अपने मजबूत विदेश निति के दम पर हर मोर्चे पर अडिग है। साथ ही समूचे विश्व ने कोविड महामारी के समय है हमारी वैक्सीन डिप्लोमसी की सराहना की है।

G-20 के अध्यक्ष के रूप में भारत पूरे वर्ष के लिए एजेंडा निर्धारित करेगा, विषयों की पहचान करेगा और क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगा, चर्चाएं करवाएगा और उनके परिणामों के दस्तावेज प्रस्तुत करेगा। भारत विविध सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों जिनमें ऊर्जा, कृषि, व्यापार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य और पर्यावरण से लेकर रोजगार, पर्यटन, भ्रष्टाचार विरोधी और महिला सशक्तिकरण तक शामिल हैं और ऐसे मुद्दे जो सबसे कमजोर और वंचितों को प्रभावित करते हैं की प्राथमिकताओं के बारे अंतर्राष्ट्रीय समर्थन प्राप्त करेगा । प्रधानमंत्री जी की दृष्टि से निर्देशित, भारत की विदेश नीति वैश्विक मंच पर नेतृत्व देने वाली भूमिका तैयार करने की है। दरअसल अब विश्व  समुदाय आर्थिक और कूटनीतिक मामलों में भारत की अनदेखी करने की स्थिति में नहीं हैं।

वैसे तो भारत की अध्यक्षता में G-20 देशों का शिखर  सम्मेलन अगले वर्ष सितंबर में होगा, लेकिन इस आयोजन के हेतु विभिन्न बैठकों का सिलसिला शुरू हो गया है , जो करीब वर्ष भर चलेगा।  वस्तुतः वर्ष 2023 में देश के 50 से अधिक शहरों में G-20 के विभिन्न कार्य समूहों की 200 से अधिक बैठकों के दौरान इस संगठन के प्रतिनिधियों और वैश्विक मीडिया से जुड़े प्रभावी लोगों को भारतीय संस्कृति के विभिन्न विशिष्ट रंगों और नए सामर्थ्यवान भारत को देखने व भारत की उपलब्धियों को अनुभव करने का एक अभूतपूर्व अवसर होगा। । भारत G-20  की अध्यक्षता करते हुए किस रीति-नीति पर चलेगा, इसकी एक झलक हाल ही में तब मिली, जब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने G-20  के लोगो, थीम और वेबसाइट का अनावरण किया । G-20   कि अध्यक्षता स्वीकारते समय प्रधानमंत्री जी ने कहा कि एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य (“One Earth, One Family, One Future”) G-20 का मंत्र है यही विचार और मूल्य लेकर भारत विश्व के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेगा। भारत की अध्यक्षता न केवल इस देश के लिये ही यादगार होगी, बल्कि भविष्य भी इसे विश्व के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में आंकेगा ।

G-20 अध्यक्ष के रूप में भारत दुनिया को दिशा और दर्शन दे सकता है। पर्यावरण परिवर्तन की समस्या हो या खाद्य समस्या, हेल्थ मैनेजमेंट हो या एनर्जी मैनेजमेंट, इस समय विश्व की नजरे भारत पर है। ऐसे में भारत के पास अपनी लीडरशिप दिखाने का मौका है।

हमारे अतिथियों को भारत की अद्भुदता, विविधता, समावेशी परंपराओं और सांस्कृतिक समृद्धि का पूरा अनुभव मिलेगा । प्रधानमंत्री मोदी जी  ने इंडोनेशिया G-20 शिखर सम्मेलन  को संबोधित करते हुए कहा था कि G-20 की जिम्मेदारी भारत ऐसे समय पर ले रहा है जब विश्व जियो पॉलिटिकल के तनाव, आर्थिक मंदी और पॉवर की बढ़ती कीमतों और दुनिया भर में आई महामारी के दुष्प्रभावों से संघर्ष कर रहा है। ऐसे समय में भारत की ओर विश्व G-20 के माध्यम से आशा की नजर से देख रहा है।

हमने ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ की जो थीम दी है, वह हमारी ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। बीते कुछ वर्षो में भारत लगातार वैश्विक मंचों पर बेहतर प्रदर्शन करता आ रहा है और 130 करोड़ भारतीयों की शक्ति और सामर्थ्य के साथ निरंतर नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।

हमारा भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र और सार्वजनिक निजी भागीदारी के मामले में विश्व  की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था तथा विश्व का दूसरी सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश है जो निश्चित रूप से स्थिर और समावेशी विकास का समर्थन करने के लिए G-20 में सार्थक योगदान देगा।

(लेखक कॉर्पोरेट लॉयर हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)